नया घर बनाने के कुछ महत्वपूर्ण जानकारी (part -01)
नमस्ते दोस्तों,
जब भी हम कोई छोटी या बड़ी चीज खरीदते है, तो चीजों को खरीदने से पहले उसके बारे में पूरा जानकरी लेते है| चीजों को तो बदल सकते है या नया ले सकते है, पर घर एक ही बार बनता है| हर मध्यम वर्ग परिवार के लिए कम से कम एक घर बनाना सपना होता है| इस सपने को पूरा करने के लिए सालों से पैसा जमा करते है| फिर बिना जानकारी का घर बनाना भविष्य में महंगा पड़ सकता है| इसलिए जानकारी आवश्यक है ताकि जरुरत की हर छोटी बड़ी चीजों को ध्यान में रख कर घर बनाया जाये और पैसे की बचत कर सके|
आजकल बड़े और मेट्रो शहरों में बड़े-बड़े apartment का प्रचलन काफी बढ़ गया है, फिर भी घर का महत्व कम नहीं हुआ है| तो आइए घर बनाने से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को जानते है|
घर किस method से बनाना चाहिए ?
माकन या घर मुख्यता दो तरह से बनाये जाते है|
- Load bearing structure
- Frame structure
Load bearing structure method में पहले masonry wall (ईंट की दीवार) बनाया जाता है| इस method में masonry wall, column area को छोड़कर beam bottom के ऊंचाई तक उठाया जाता है| उसके बाद column को beam bottom तक cast किया जाता है| फिर Slab (छत) और beam को एक साथ डालते है| इस method में दीवार और column के बीच अच्छा bonding strength (एक दूसरे को पकड़ने वाली ताकत) बनता है, पर column का strength कम हो जाता है| क्योंकि ईंटों में water absorption (पानी सोखने की क्षमता) ज्यादा होता है| इसी कारण से concrete में मौजूद पानी को ईंटें सोख लेता है और column कमजोर हो जाता है| इस तरह के structure में, structure का भार column के साथ-साथ ईंट के दीवारों पर भी आता है| इसलिए ईंट की दीवारें मोटी बनायीं जाती है, इस वजह से कमरे का area (क्षेत्रफल) कम मिलता है| इस तरह के structure में अगर भविष्य में floor plan में कुछ बदलाव करना चाहे तो नहीं कर सकते है| इसमें structure और wall के बीच अच्छी bonding होने के कारण cracks (दरारें) आने के chance कम होता है| Frame structure के तुलना में load bearing structure को बनाने में कम खर्च आता है| Load bearing structure में बहुमंजिल इमारतें नहीं बनाया जा सकता है|
Frame structure method में पहले column, beam, और slab का frame structure खड़ा किया जाता है| उसके बाद ईंट की दीवारें बनाए जाते है| इस तरह के structure में column और ईंट के दीवारों के बीच bonding strength, load bearing structure के तुलना में कम होता है और cracks आने का chance ज्यादा होता है| पर bonding strength को कुछ technic (उपाय) का उपयोग कर बढ़ाया जा सकता है, जैसे कि column और beam में hacking करना और ईंट की दिवार जोड़ते समय column और beam में cement का घोल लगाना आदि| ईंट की दीवार column और beam के साथ परस्पर joints बनाते है| इनके बीच bonding strength कम होने के कारण दरार आने chance ज्यादा रहता है| इन cracks (दरारों) को रोकने के लिए chicken mesh (मुर्गा जाली) का उपयोग किया जाता है| इस method में column और beam का strength, load bearing structure के तुलना में ज्यादा होता है| इस method का सबसे बड़ा फायदा, जरुरत पड़ने पर floor plan में बदलाव कर सकते है|इसमें structure load ईंट के दीवारों पर नहीं आता है, इसलिए बहार के दीवारों को मोटा और अंदर के दीवारों को पतला बनाया जा सकता है| अंदर की दीवारें पतली होने के कारण कमरे का क्षेत्रफल ज्यादा प्राप्त होता होता है| बहुमंजिल इमरतों को बनाने के लिए frame structure method का उपयोग किया जाता है|
इन दोनों method का फायदा और नुकसान आप अच्छे से समझ सकते है और एक सही method का चुनाव कर सकते है| पर civil engineer के हैसियत से मेरा सुझाव है कि आप frame structure method से ही घर बनाए| हो सके तो घर बनाने का contract किसी civil इंजीनियर को ही दे, क्योंकि इंजीनियर के पास कार्य अनुभव के साथ-साथ तकनिकी ज्ञान भी होता है|
आगे के parts के लिए आप comments कर सकते है|
Frame structure method में पहले column, beam, और slab का frame structure खड़ा किया जाता है| उसके बाद ईंट की दीवारें बनाए जाते है| इस तरह के structure में column और ईंट के दीवारों के बीच bonding strength, load bearing structure के तुलना में कम होता है और cracks आने का chance ज्यादा होता है| पर bonding strength को कुछ technic (उपाय) का उपयोग कर बढ़ाया जा सकता है, जैसे कि column और beam में hacking करना और ईंट की दिवार जोड़ते समय column और beam में cement का घोल लगाना आदि| ईंट की दीवार column और beam के साथ परस्पर joints बनाते है| इनके बीच bonding strength कम होने के कारण दरार आने chance ज्यादा रहता है| इन cracks (दरारों) को रोकने के लिए chicken mesh (मुर्गा जाली) का उपयोग किया जाता है| इस method में column और beam का strength, load bearing structure के तुलना में ज्यादा होता है| इस method का सबसे बड़ा फायदा, जरुरत पड़ने पर floor plan में बदलाव कर सकते है|इसमें structure load ईंट के दीवारों पर नहीं आता है, इसलिए बहार के दीवारों को मोटा और अंदर के दीवारों को पतला बनाया जा सकता है| अंदर की दीवारें पतली होने के कारण कमरे का क्षेत्रफल ज्यादा प्राप्त होता होता है| बहुमंजिल इमरतों को बनाने के लिए frame structure method का उपयोग किया जाता है|
इन दोनों method का फायदा और नुकसान आप अच्छे से समझ सकते है और एक सही method का चुनाव कर सकते है| पर civil engineer के हैसियत से मेरा सुझाव है कि आप frame structure method से ही घर बनाए| हो सके तो घर बनाने का contract किसी civil इंजीनियर को ही दे, क्योंकि इंजीनियर के पास कार्य अनुभव के साथ-साथ तकनिकी ज्ञान भी होता है|
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